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ग्रह गोचर क्या होता है और इसका जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
July 30, 2025

ग्रह गोचर क्या होता है और इसका जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

🔭 भूमिका:

क्या आपने कभी अचानक जीवन में बदलाव महसूस किया है — जैसे नौकरी में उतार-चढ़ाव, रिश्तों में तनाव या आत्मविश्वास में वृद्धि?
बहुत बार इन घटनाओं के पीछे कारण होता है ग्रहों का गोचर (Planetary Transit)

गोचर का अर्थ होता है – ग्रहों की एक राशि से दूसरी राशि में यात्रा। जब कोई ग्रह एक राशि से दूसरी में प्रवेश करता है, तो वह आपके जीवन में कुछ विशेष प्रभाव डालता है। यह प्रभाव सकारात्मक भी हो सकता है और चुनौतीपूर्ण भी।

इस पोस्ट में हम जानेंगे:

  • गोचर क्या होता है
  • प्रमुख ग्रहों के गोचर के प्रभाव
  • गोचर कैसे आपकी कुंडली को प्रभावित करता है
  • और कैसे इससे लाभ लिया जा सकता है

🪐 गोचर क्या है?

गोचर का अर्थ है किसी ग्रह का एक राशि से दूसरी राशि में जाना। जब कोई ग्रह आकाश में चलता है और किसी अन्य राशि में प्रवेश करता है, तो उसे ज्योतिष में गोचर कहा जाता है। यह गोचर व्यक्ति की जन्म कुंडली के विभिन्न भावों (हाउस) को प्रभावित करता है।

🪐 प्रमुख ग्रहों के गोचर और उनके सामान्य प्रभाव

🌞 सूर्य (Surya) – हर महीने गोचर करता है

  • आत्मविश्वास, नेतृत्व, पिता और सरकारी कार्यों में बदलाव
  • सकारात्मक: ऊर्जा और पहचान बढ़ाता है
  • नकारात्मक: अहंकार और स्वास्थ्य समस्याएँ

🌙 चंद्रमा (Chandra) – हर ढाई दिन में गोचर

  • मन की स्थिति, भावनात्मक उतार-चढ़ाव
  • यह सबसे तेज़ गति वाला ग्रह है और रोज़ का मूड बदल सकता है

🟠 मंगल (Mars) – हर 45 दिन में गोचर

  • साहस, क्रोध, ऊर्जा, दुर्घटनाएँ
  • शुभ गोचर: उत्साह और एक्शन बढ़ाता है
  • अशुभ गोचर: गुस्सा, झगड़े

🟡 बुध (Mercury) – हर 21 दिन में गोचर

  • संवाद, बुद्धिमत्ता, व्यापार
  • शुभ गोचर: सोचने और बोलने की शक्ति बढ़ाता है
  • अशुभ गोचर: भ्रम और गलतफहमी

🟤 गुरु (Jupiter) – साल में एक बार गोचर

  • ज्ञान, विवाह, संतान, धर्म
  • शुभ गोचर: भाग्य और विकास लाता है
  • अशुभ गोचर: अवसरों की कमी, आलस्य

शनि (Saturn) – हर ढाई साल में एक राशि में

  • कर्म, संघर्ष, न्याय, बाधाएं
  • शुभ गोचर: अनुशासन और दीर्घकालिक सफलता
  • अशुभ गोचर: देरी, थकावट, साढ़ेसाती

राहुकेतुहर 18 महीने में गोचर

  • भ्रम, परिवर्तन, कर्म फल
  • ये हमेशा वक्री (retrograde) चलते हैं
  • रहस्यमयी और अचानक बदलाव लाने वाले

🔍 गोचर कैसे आपकी कुंडली को प्रभावित करता है?

हर व्यक्ति की कुंडली में ग्रह एक विशेष भाव (हाउस) में स्थित होते हैं। जब कोई ग्रह गोचर करता है, तो वह जन्म-कुंडली के उस भाव को सक्रिय करता है।

उदाहरण:

  • यदि शनि आपके चौथे भाव में गोचर करता है, तो घर, माँ और स्थायित्व से जुड़े अनुभव होंगे।
  • गुरु का सातवें भाव में गोचर शादी और पार्टनरशिप के योग बढ़ा सकता है।

🛐 गोचर से लाभ कैसे लें?

  • ज्योतिषीय उपाय करें जैसे मंत्र, दान, व्रत आदि
  • महत्वपूर्ण कार्यों की टाइमिंग चुनें गोचर देखकर
  • किसी विशेषज्ञ से गोचर आधारित परामर्श लें
  • अपने विचारों और भावनाओं को समझें, क्योंकि गोचर कभी-कभी “आत्म-सुधार” का मौका भी होता है

🌌 निष्कर्ष:

गोचर, ब्रह्मांड के उस संकेतन की तरह है जो हमें समय, कर्म और निर्णय का संकेत देता है। यह जानना कि कौन सा ग्रह कब और कहाँ गोचर कर रहा है, आपको जीवन की दिशा को बेहतर समझने और समय के अनुसार निर्णय लेने में मदद करता है।

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