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कुंडली मिलान – क्या सिर्फ गुण मिलाना ही काफी है?
July 30, 2025

कुंडली मिलान – क्या सिर्फ गुण मिलाना ही काफी है?

💍 भूमिका:

शादी दो आत्माओं का पवित्र बंधन है, लेकिन क्या ये रिश्ता सिर्फ प्यार या पसंद पर टिका होता है?
भारतीय संस्कृति में, विवाह से पहले कुंडली मिलान (Horoscope Matching) एक महत्वपूर्ण परंपरा है। अक्सर लोग केवल गुण मिलान (Gun Milan) को ही कुंडली मिलान समझ लेते हैं, लेकिन क्या वास्तव में यह पर्याप्त है?

इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे:

  • कुंडली मिलान में क्या-क्या देखा जाता है
  • गुण मिलान का महत्व और सीमाएँ
  • और किन अन्य बातों पर ध्यान देना ज़रूरी होता है

📜 गुण मिलान (Ashtakoot Milan) क्या है?

अष्टकूट मिलान का मतलब होता है आठ प्रमुख क्षेत्रों में अनुकूलता की जाँच। इनमें कुल 36 गुण होते हैं। यदि लड़के और लड़की के बीच 18 से अधिक गुण मिलते हैं, तो ज्योतिष अनुसार विवाह संभव माना जाता है।

🔸 8 कूट कौनकौन से हैं?

  1. वर्ण (1 गुण) – मानसिक स्तर की समानता
  2. वश्य (2 गुण) – एक-दूसरे पर नियंत्रण की शक्ति
  3. तारा (3 गुण) – जन्म नक्षत्र की अनुकूलता
  4. योनि (4 गुण) – स्वभाव और शारीरिक संगतता
  5. ग्रह मैत्री (5 गुण) – ग्रहों के बीच दोस्ती
  6. गण (6 गुण) – स्वभाव की गहराई
  7. भकूट (7 गुण) – स्वास्थ्य और समृद्धि
  8. नाड़ी (8 गुण) – संतान और अनुवांशिकता से जुड़ा

क्या सिर्फ गुण मिलान पर्याप्त है?

नहीं। केवल गुण मिलान एक सतही दृष्टिकोण है। कई बार 30+ गुण मिलने के बावजूद भी शादी सफल नहीं होती। इसके पीछे कारण हैं:

⚠️ क्याक्या और देखा जाना चाहिए?

  1. मंगल दोष (Mangal Dosha):
    यदि किसी एक की कुंडली में मंगल है और दूसरे की में नहीं, तो वैवाहिक जीवन में संघर्ष हो सकता है।
  2. दशा और अंतरदशा:
    विवाह के समय दोनों की दशा–अंतरदशा अनुकूल होनी चाहिए। वरना अच्छे गुण होने पर भी मानसिक तनाव हो सकता है।
  3. चंद्र कुंडली की स्थिति:
    चंद्रमा भावनाओं और मन का प्रतीक है। चंद्र कुंडली से भी मेल देखा जाता है।
  4. शुक्र और गुरु की स्थिति:
    लड़कों की कुंडली में शुक्र और लड़कियों में गुरु का स्थान विवाह सुख को दर्शाता है।
  5. भावों की अनुकूलता:
    सप्तम भाव (7th House), नवम भाव (9th), चतुर्थ भाव (4th) – इनका अध्ययन अनिवार्य है।

सफल वैवाहिक जीवन के लिए क्या करें?

  • गुण मिलान के साथसाथ सम्पूर्ण कुंडली मिलाएं।
  • किसी योग्य वैदिक ज्योतिषी से व्यक्तिगत परामर्श लें।
  • यदि दोष हो, तो उचित ज्योतिषीय उपाय (जैसे पूजा, मंत्र जाप, रत्न धारण) करें।
  • विवाह से पहले एक-दूसरे को समझने और विश्वास बनाने का भी समय दें।

🧘 निष्कर्ष:

कुंडली मिलान एक उपयोगी परंपरा है, लेकिन केवल गुणों की संख्या के आधार पर विवाह तय करना समझदारी नहीं है।
संपूर्ण कुंडली का अध्ययन, ग्रह दशा और मानसिक संगतता — ये सभी मिलकर ही सफल और संतुलित वैवाहिक जीवन की नींव रखते हैं।

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